एक लड़का था, सीधा साधा भोला भाला. नाम था उसका आशीष. बचपन से ही पढाईमें अव्वल था. उसके रहनसहनमें एक सादगी थी. हमेशा दोस्तोंकी वो मदद करता था. दोस्तोका वो सबसे चहिता था, और माँ-बाप का लाडला. समय की रफ़्तार कभी ना थमी, अच्छे कॉलेज में आशीष की एडमिशन जमी. नये दोस्त नयी जगह, आशीष ने कायम राखी अपनी छवी. अचानक एक दिन उसकी जिंदगी में आया सैलाब, उसने जाना की उसका दिल उसके पास नहीं है, डर के मारे वो हर जगह ढूंडने लगा. तभी उसने एक लड़की को देखा, वो उसका दिल लेके जा रही थी. भागते-दौड़ते वो उस लड़की के पास आया, लेकिन उससे कुछ कह नहीं पाया. कुछ कहने के लिए चाहिए था उसे जिगर, जो उस लड़की ने पहले से ही चुरा लिया था. हताश हो कर वो पलट गया. जब उसने अपने दिल (खोने) की बात दोस्तोंको बताई, तब एक दोस्त रोहित खुशीसे चिल्लाया, " ऐ मेरे मासूम दोस्त, तू इश्क के समंदर में गया है डूब, अब ले मजे तैरने के खूब" दोस्तोंका हँसिमजाक उसने बहोत सहा, लेकिन उस लड़की का खयाल हमेशा उसके जहन में रहा. कॉलेज में हमेशा उसकी नजरे उसे ढुंडती थी, लेकिन जब कभी वो सामने होती थी तो ये खुद अपनी नजरे पलट देता था. डरता था की कही उसकी आँखे तो उसके सारे अरमान ना बयां कर दे. एक दिन अचानक वह लड़की आशीष के पास आयी, उसके धडकनोंकी रफ़्तार तेज़ हुई. "आशीष, क्या तुम मुजे अपनी कॉपी दे सकते हो?", उसने मुस्कुराते हुए पूछा. "हां.", एक लब्ज के सिवा आशीष कुछ ना कह सका. तभी उसने देखा की उसके दोस्तोंकी टोली सड़क के उस पार खड़ी होकर सब देख रही है. उसने सोचा, 'मर गए आज तो बहोत खिचाई होने वाली है. अच्छा है की ये सब कमीने सड़क के उस पार है.' तभी रोहित अचानक वहा आया. "अरे नालायक, मैं तुझे कबसे कॉपी मांग रहा था तब मुझे नहीं दी, और आज रोशनी ने मागी तो बिना कुछ कहे दे रहा है.", आशीष सोचता ही रहा की इस कमीनेने मुझसे कब कॉपी मांगी, उस पुरी नौटंकीसे अनजान रोशनी सहम गयी और कॉपी वापस करने लगी. तभी आशीष ने कहा, "अरे नहीं नहीं, तुम्हारा काम हो जाने के बाद वापस करना, ये तो मजाक कर रहा है." इस रोहित के बच्चे को तो मैं बहोत पिटूँगा, आशीष मन ही मन में सोच रहा था. "थैंक्स, बाय!!", मुस्कुराते और शरमाते हुए वो लड़की वहा से निकल गयी.
सड़क के उस पार सारे दोस्तोने आशीष को घेर लिया और ताने मारने लगे. "उसके भी दिल में तेरे लिए है प्रीत जागी, लागी लागी लागी प्रेमरोग लागी", रोहित चिल्ला चिल्ला के गाने लगा. "बकवास बंद कर बेशरम.", आशीष गुस्साया. तभी उसने देखा की सड़क के उस पार रोशनी की सहेलियोने भी उसे परेशान कर रखा है...वो दिल ही दिल में मंद मंद मुस्कुराया. अब हर दिन कॉलेज में उसके सारे दोस्त उसे चिढाते थे, वो भी झूट-मुट का गुस्सा दिखाता था लेकिन उसके दिल में भी लड्डू फूटते थे. इसी तरह दो साल बीत गए, और कॉलेज ख़तम हो गया...लेकिन आशीषने कभी अपने दिल की बात बयाँ ना की. उसके सारे दोस्त उसे कहते रहे लेकिन वो चुप रहा, इंतजार में...उसके एक इशारे के इन्तेजार में. वो इशारा जो उसे कभी नसीब ना हुआ. वो अपने दोस्तों को कोसता रहा, क्योंकि वो सोचता था की उनकी वजहसे वो प्यार की ग़लतफहमीमें रहा. कॉलेज के बाद नौकरी के चक्कर में वो सारी पुरानी बातें भूल गया. अचानक, एक दिन रोहित का कॉल आया, "मैं शहर में आया हु...मिलने आ जा." पुराने दोस्त से मिलने की ख़ुशी में वो रेस्तोरां पहुचा तो उसने देखा रोहित के साथ एक लड़की थी. पास जाने के बाद उसने पहचाना की वो उनकी क्लासमेट संगीता थी. थोड़ी देर इधर उधर की बातें करने के बाद रोहित ने पूछा, "रोशनी के कोई बात हुए?" आशीष ने सिर्फ सर हिलाते हुए ना कहा. तभी संगीता बोल पड़ी, "आशीष, हम सब जानते थे की तुम उसे पसंद करते थे...और अभी कुछ दिनों पहले मैं उससे मिली तो उसने बताया की वो भी ये बात जानती थी. हालाँकि तुमने खुद ये बात उसे कभी नहीं बताई, इसीलिए उसने भी तुमसे एक बात छुपाई." "कोनसी बात?", आशीष ने अचंभा से उसे पूछा. "की वो भी तुम्हे पसंद करती थी." "सच!", आशीष की ख़ुशी फुले ना समां रही थी. उसे वो इशारा मिल गया था. मैं कल ही जाकर उसे अपने दिल की बातें बता दूंगा, आशीष ने सोचा. "आशीष, तुने देर कर दी यार.", रोहित बोल पड़ा. "मतलब?", आशीष ने पूछा. "संगीता रोशनीको उसकी शादी में मिली.", कॉफ़ी पीकर जब सब लोग बहार निकले, आशीष अकेला रस्ते पे चल रहा था, अपने आस-पास की दुनियासे उसे कोई लेनादेना ना रहा. सड़क के किनारे एक चाय की दूकान में पुराने रेडियो में गाना बज रहा था, "दिल जलता है तो जलने दे, आंसू ना बहा, फ़रियाद ना कर......"
Tuesday, July 19, 2011
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6 comments:
Kya baat hai.. Ab to vaid babu Hindi me bhi kalam (Key board) chalane lage...
hi champ nice try bt i feel if it will be more specific in terms of asish then????????????
you know what i mean. well thanx 4 fullfillin our request.
keep up the same
ALL D BEST...........
Kya baat hai bublya.....
Lekin Rohitka description jama nahi yaar....
Anyways nice attempt..... So whats next in the store.... :)
"उसके भी दिल में तेरे लिए है प्रीत जागी, लागी लागी लागी प्रेमरोग लागी" here comes original babloo....
GREAT ATTEMP BABLOO.
Good one... Enjoyed reading it... Ab is baar college main yeh galti mat dohrana.. :)
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